Sun Dec 10 23:56:32

प्रियंका गांधी भी कह चुकी हैं मोदी को नीच, तब कांग्रेस ने खाई थी मुंह की
नई दिल्ली। गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग से ठीक दो दिन पहले कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नीच और असभ्य कहा। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब अय्यर ने इस तरह का बयान दिया है। साल 2014 के लोकसभा चुनावों में भी उन्होंने मोदी को चाय बेचने वाला कहा था। इसके साथ ही प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी मोदी को नीच कहा था, जिसका खामियाजा लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उठा चुकी है। बतातें चलें कि साल 2014 में प्रियंका गांधी ने मोदी की राजनीति को नीच बताया था। तब मामला नीच जाति तक पहुंच गया था। अमेठी में नरेंद्र मोदी ने स्व. राजीव गांधी पर सीधा हमला बोला था, जिसके बाद उनकी बेटी प्रियंका गांधी ने कहा था कि मोदी की 'नीच राजनीति' का जवाब अमेठी की जनता देगी। मोदी ने प्रियंका के इस बयान को नीच राजनीति से निचली जाति पर खींच लिया और ऐसा बवंडर खड़ा हुआ कि कांग्रेस फिर सफाई देते-देते परेशान रही और इसका खामियाजा भी कांग्रेस को उठाना पड़ा। मोदी ने तब प्रियंका की नीच राजनीति वाले बयान पर कहा था कि सामाजिक रूप से निचले वर्ग से आया हूं, इसलिए मेरी राजनीति उन लोगों के लिये 'नीच राजनीतिÓ ही होगी। हो सकता है कुछ लोगों को यह नजर नहीं आता हो, पर निचली जातियों के त्याग, बलिदान और पुरुषार्थ की देश को इस ऊंचाई पर पहुंचाने में अहम भूमिका है। इसी 'नीच राजनीतिÓ की ऊंचाई पिछले 60 सालों के कुशासन और वोट बैंक की राजनीति से भारत को मुक्त कर भारत मां के कोटि-कोटि जन के आंसू पोंछेगी। इसी 'नीच राजनीतिÓ की ऊंचाई भारत मां को एक समृद्ध और शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में विश्व में स्थान दिलाने की ताकत रखती है।
तब अय्यर ने कहा था चाय वाला
जनवरी 2014 में मणिशंकर अय्यर ने कहा था, '21वीं सदी में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन पाएं, ऐसा मुमकिन नहीं है। मगर, वह कांग्रेस के सम्मेलन में आकर चाय बेचना चाहें, तो हम उनके लिए जगह बना सकते हैं।' इस बयान पर ऐसा बवाल हुआ था कि कांग्रेस को जवाब देते नहीं बन रहा था। कांग्रेस की सहयोगी पार्टियां भी अय्यर के इस बयान के खिलाफ खड़ी हो गई थीं और कहा था कि मोदी को चायवाला कहना गलत है।
राहुल ने की डैमेज कंट्रोल की कोशिश
अय्यर के बयान के आने के तुरंत बाद राहुल ने डैमेज कंट्रोल की भरसक कोशिश की। उन्होंने ट्वीट किया, 'भाजपा और पीएम हमेशा कांग्रेस पार्टी पर हमले के लिए गंदी भाषा का इस्तेमाल करते हैं। कांग्रेस की संस्कृति और विरासत अलग है। प्रधानमंत्री के लिए मणिशंकर अय्यर का लहजा और भाषा ठीक नहीं है। कांग्रेस पार्टी और मैं उम्मीद करते हैं कि अपने कहे के लिए वो माफी मांगेंगे।' इसके बाद अय्यर ने छह बार मांफी मांगी, लेकिन कांग्रेस को 2014 के आम चुनाव की तरह इस बार गुजरात के विधानसभा चुनाव में जो नुकसान होना था, वह हो चुका है। प्रधानमंत्री मोदी ने अय्यर के इस बयान पर कांग्रेस के बुरी तरह से घेर लिया है।
क्या कहा है मोदी ने सूरत की रैली में
प्रधानमंत्री मोदी ने सूरत में चुनाव रैली में अय्यर के अपमानजनक बयान पर कहा, आप सबने मुझे देखा है। मैं सीएम रहा, पीएम हूं। क्या किसी को मेरे कारण शर्म से सिर झुकाना पड़ा है। क्या मैंने कोई शर्मिंदा होने वाला काम किया है। फिर वो मुझे नीच क्यों कह रहे हैं। उन लोगों ने हमें क्या-क्या कहा। गदहा, नीच, गंदी नाली के कीड़े। गुजरात के लोग 18 दिसंबर को ऐसी घटिया भाषा का करारा जवाब देंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने पहले चरण के प्रचार के आखिरी दिन अय्यर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए एक रैली में कहा कि जनता 18 दिसंबर को बता देगी कि कौन नीच आदमी है। गुजरात विधानसभा के लिए 9 दिसंबर को पहले चरण और 14 दिसंबर को दूसरे चरण की वोटिंग है, जिसके नतीजे 18 दिसंबर को आएंगे।

अगर मां को सलाम नहीं करोगे तो क्या अफजल को करोगे: नायडू
नई दिल्ली। वंदे मातरम का विरोध करने वालों को लेकर उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम को लेकर विवाद होता है। मां तुझे सलाम, अगर मां को सलाम नहीं करोगे तो किसको करोगे? अफजल गुरु को सलाम करोगे क्या? उपराष्ट्रपति गुरुवार को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल पर पुस्तक का विमोचन में शामिल हुए जहां उन्होंने वंदे मातरम कि विरोध करने वालों पर निशना साधा। वहीं उन्होंने राम मंदिर का भी जिक्र किया और कहा कि रामजन्मभूमि आंदोलन मुसलमानों के खिलाफ नहीं है। आंदोलन सिर्फ एक स्थल पर ऐतिहासिक व पौराणिक दावे तक सीमित था। नायडू ने कहा कि पूरे देश से आए कारसेवकों ने एक भी मुस्लिम धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं की। वेंकैया नायडू के अनुसार, किशोरावस्था से ही आजीवन प्रचारक रहे अशोक सिंघल हिंदू संस्कृति और गौरव को पुनस्र्थापित करने के लिए काम करते रहे। उन्होंने भारतीय संस्कृति को समावेशी बताते हुए कहा कि अंग्रेजों के शासन से पहले दुनिया के जीडीपी में भारत का हिस्सा 27 फीसदी था। इसके बावजूद भारत ने किसी पर हमला करने की कोशिश नहीं की। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि हिंदू एक संस्कृति और जीवन पद्धति है, जो गंगा जैसी विशाल है। जो सभी धर्मों को मिलजुलकर सद्भावना के साथ रहने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल इसी जीवंत नदी के पावन जल से सब भारतीयों को पुनीत करने के लिए आजीवन प्रयास करते रहे। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में अशोक सिंघल को रामजन्मभूमि आंदोलन का प्रणेता माना जाता है। लेकिन, वेंकैया नायडू ने साफ किया कि यह आंदोलन किसी धर्म के खिलाफ नहीं था। उन्होंने कहा कि पूरे देश में यह आंदोलन हो रहा था और कोने-कोने से स्वयंसेवक कारसेवा के लिए आए थे। लेकिन, रास्ते में इस्लाम के एक भी धार्मिक स्थल को नुकसान नहीं पहुंचाया गया। यह इसका सुबूत है कि पूरा आंदोलन सिर्फ रामजन्मभूमि तक सीमित था। इस अवसर पर हरिद्वार में भारत माता मंदिर के संस्थापक स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि ने अशोक सिंघल को राष्ट्र ऋषि की संज्ञा दी।
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पड़ोसियों को मिला विराट-अनुष्का की शादी का निमंत्रण
मुंबई । भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली के साथ अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के अगले हफ्ते होने वाले विवाह की खबरों की पुष्टि हो गई है। अनुष्का के कुछ पड़ोसियों ने उन्हें शादी का निमंत्रण मिलने की बात कही है। अनुष्का मुंबई के वर्सोवा स्थित बदरीनाथ टावर में रहती हैं। सूत्रों ने बताया कि इस बहुमंजिला इमारत में रहने वाले कुछ लोगों को अनुष्का के पिता अजय कुमार शर्मा ने खुद फोन करके निमंत्रण दिया है। चूंकि हर कोई इटली जाकर शादी में सम्मिलित नहीं हो सकता, इसलिए उन्हें फोन करके इस फैसले की जानकारी देने के साथ-साथ होने वाले वर-वधू के लिए आशीर्वाद भी लिया जा रहा है। सूत्रों ने यह भी बताया कि मीडिया की चकाचौंध से बचने के लिए अनुष्का के पड़ोसियों से जानकारियों को गुप्त रखने का अनुरोध भी किया गया है। इस हाई प्रोफाइल शादी को लेकर खबरों का बाजार अभी भी गरम है। बताया जा रहा है कि जुहू के एक लोकप्रिय पांच सितारा होटल को तीन दिनों के लिए बुक कराया गया है। यह भी बताया जा रहा है कि विराट और अनुष्का 12 या 18 दिसंबर को शहर में ही कोर्ट मैरिज करेंगे। लेकिन, अनुष्का के करीबी सूत्रों का कहना है कि शादी इटली में ही होगी। अब इसे संयोग कहें या कुछ और, लेकिन अनुष्का के मेंटर आदित्य चोपड़ा और अभिनेत्री रानी मुखर्जी ने भी इटली में ही शादी की थी। इस बीच ?अनुष्का और उनके परिवार को गुरुवार रात को छत्रपति शिवाजी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर देखा गया, जिससे इस बात को बल मिला कि वे शादी के लिए इटली रवाना हुए हैं।

अय्यर का निलंबन रणनीतिक खेल, लोग समझें इस खेल को : जेटली
नई दिल्ली: केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 'नीच' संबोधित करने को जानबूझकर दिया गया जातिवादी बयान करार दिया तथा पार्टी से उनके निलंबन को रणनीतिक बताया एवं लोगों से इस खेल को समझने की अपील की. जेटली ने ट्वीट किया,मणिशंकर अय्यर का प्रधानमंत्री पर 'नीचÓ संबोधन वाला प्रहार जानबूझकर दिया गया जातिवादी बयान है. सुविधा के हिसाब से माफी मांग ली गयी है, रणनीति की दृष्टि से उन्हें निलंबित किया गया है. लोगों को यह खेल समझना चाहिए.ÓÓउन्होंने ने यह कहते हुए अय्यर पर पलटवार किया कि उनका बयान ऐसी मानसिकता को प्रदर्शित करता है कि केवल एक कुलीन परिवार ही शासन कर सकता है. उससे पहले अय्यर ने मोदी को 'नीच आदमीÓसंबोधित किया था.
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राहुल को अगले हफ्ते मिल सकता है कांग्रेस अध्यक्ष चुने जाने का सर्टिफिकेट
नई दिल्ली : राहुल गांधी को कांग्रेस पार्टी के शीर्ष पद तक पहुंचाने की सभी तैयारियों के बीच उम्मीद है कि अगले सप्ताह उन्हें उनकी मां और पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में औपचारिक रूप से उनकी नियुक्ति का प्रमाण पत्र जारी करने की घोषणा कर दी जाएगी. हालांकि अभी इसकी तारीख तय नहीं हुई है, लेकिन कांग्रेस के सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि राहुल को 14 दिसंबर से 16 दिसंबर के बीच पार्टी अध्यक्ष का प्रमाणपत्र दिया जा सकता है. अमेठी के 47 वर्षीय सांसद पार्टी के इस शीर्ष पद के लिए इकलौते उम्मीदवार हैं. वह करीब पांच साल से कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष भी हैं. पार्टी के सभी पदाधिकारियों के समर्थन के बीच उन्होंने तीन दिन पहले कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिये नामांकन दाखिल किया था. एक सूत्र ने कहा, 'कांग्रेस मुख्यालय में अगले सप्ताह एक बड़ी घटना होगी. इसमें सोनिया गांधी के आने की उम्मीद है. इसके अलावा पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता, विभिन्न राज्यों से कांग्रेस  संसदीय कमेटी के नेताओं के भी वहां उपस्थित रहने की उम्मीद है
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घूस मामले में 11 पूर्व सांसदों पर चलेगा मुकदमा, आरोप तय
नई दिल्ली : दिल्ली की एक अदालत ने 2005 के सवाल के बदले नकद घोटाला मामले में 11 पूर्व सांसदों पर भ्रष्टाचार और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप तय किए. विशेष न्यायाधीश किरन बंसल ने 11 पूर्व सांसदों और एक अन्य व्यक्ति पर मुकदमा चलाने के आदेश दिए. यह मुकदमा 12 जनवरी से शुरू होगा. इसमें बीजेपी के छह सांसद, जिनमें एक राज्यसभा के, बीएसपी के तीन, राजद का एक और कांग्रेस का एक सांसद शामिल थे. इस मामले में तत्कालीन सांसद वाईजी महाजन (बीजेपी), छत्रपाल सिंह लोढ़ा (बीजेपी), अन्ना साहेब एम के पाटिल (बीजेपी), मनोज कुमार (राजद), चंद्र प्रताप सिंह (बीजेपी), राम सेवक सिंह (बीजेपी), नरेन्द्र कुमार कुशवाहा (बीएसपी), प्रदीप गांधी (बीजेपी), सुरेश चंदेल (बीजेपी), लाल चंद्र कोल (बीएसपी) और राजा रामपाल (बीएसपी) को आरोपी बनाया गया है.बता दें कि दो पत्रकारों ने तत्कालीन सांसदों के खिलाफ एक स्टिंग ऑपरेशन किया गया था जो 12 दिसंबर, 2005 को एक निजी समाचार चैनल पर प्रसारित हुआ था. यह स्टिंग जिसमें संसद में सवाल पूछने के बदले में नोट लेने की बात सामने आई थे, इसे सवाल के बदले नकद घोटाला के नाम से जाना जाता है. इस स्टिंग ऑपरेशन में जो सांसद फंसे थे, उसकी जांच के लिए पवन बंसल की अध्यक्षता में लोकसभा ने समिति बनाई थी, जिसने दिसंबर, 2005 में इन सभी सांसदों को बर्खास्त करने की सिफारिश की थी और उन्हें बर्खास्त भी कर दिया गया था.दिसंबर, 2005 में लोकसभा ने 10 सदस्यों को निष्काषित कर दिया था जबकि लोढ़ा को राज्य सभा से हटाया गया था. अभियोजन पक्ष ने अपनी दलीलों के समर्थन में सीडी और डीवीडी पेश की जिसमें आरोपियों और अन्य के बीच हुई बातचीत कैद है. विशेष लोक अधिवक्ता अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि अदालत ने रामपाल के तत्कालीन निजी सहायक रविंद्र कुमार के खिलाफ भी आरोप तय किए हैं. एक अन्य आरोपी विजय फोगाट के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई क्योंकि उसकी मौत हो चुकी है. फोगाट ने इस मामले में कथित तौर पर एक बिचौलिए की भूमिका निभाई थी. अदालत ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत आपराधिक षड्यंत्र रचने और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के प्रावधानों के तहत आरोप तय किए हैं. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में वर्ष 2009 में आरोप पत्र दाखिल किया था. पूर्व सांसदों के अलावा दो पत्रकारों का भी नाम आरोप पत्र में शामिल किया गया था जिनपर भ्रष्टाचार निरोधी कानून के तहत कथित रूप से अपराध को बढ़ावा देने के आरोप थे. निचली अदालत ने उन्हें समन भेजा था. लेकिन दिल्ली उच्च न्यायालय ने उनके खिलाफ जांच को रद्द कर दिया था.
31 मार्च तक बढ़ाई जा सकती है आधार लिंक करने की तारीख: केंद्र
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि बैंक खातों व अन्य सेवाओं के लिए आधार कार्ड लिंक करवाने की तारीख 31 मार्च 2018 तक के लिए बढ़ाई जा सकती है। हालांकि, एटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल ने अदालत के सामने कहा कि मोबाइल नंबर से आधार लिंक करवाने की तारीख 6 फरवरी ही रहेगी। एटॉर्नी जनरल ने अदालत को यह भी बताया कि डेटा प्रोटेक्शन कमेटी सरकार के सामने अपनी अंतिम रिपोर्ट फरवरी 2018 तक रख देगी। बता दें कि सरकार ने न सिर्फ अहम सेवाओं से आधार को लिंक करवाना अनिवार्य किया है बल्कि उसने इसके लिए कुछ निश्चित तारीखों का भी ऐलान किया है। अब तक अधिकतर कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए 31 दिसंबर, 2017 तक आधार कार्ड को लिंक कराना जरूरी था। आधार की अनिवार्यता पर रोक की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक बेंच गठित करने की बात कही है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि अगले सप्ताह अदालत 5 सदस्यीय संविधान पीठ का गठन करेगी, जो अर्जियों पर सुनवाई करेगी। सरकार का पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने कहा कि आधार कार्ड की अनिवार्यता पर अब रोक नहीं लगाई जा सकती क्योंकि अब इस पर काफी आगे बढ़ा जा चुका है और कई साल बीत गए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस मसले पर बहस करने के लिए तैयार है। केस की सुनवाई के दौरान आधार कार्ड की अनिवार्यता को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष अदालत से मामले को तेजी से निपटाने की भी मांग की।
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अंबेडकर का नाम लेकर वोट लेने वालों को बाबा साहेब से ज्यादा भोले बाबा याद आ रहे: मोदी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को दिल्ली में डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर इशारों में तीखा हमला बोला। पीएम मोदी ने इस दौरान कांग्रेस के अलावा काग्रेस उपाध्यक्ष पर उनके मंदिर दर्शन पर पर निशाना साधा। पीएम मोदी ने कहा कि 'अंबेडकर के इस केंद्र को बनाने का निर्णय 1992 में लिया गया था लेकिन 23 साल तक कुछ नहीं हुआ। जो राजनीतिक दल बाबा साहेब के नाम से वोट मांगते हैं उन्हें तो यह पता भी नहीं होगा। खैर उन्हें आजकल बाबा साहेब नहीं, बाबा भोले जरा ज्यादा याद आ रहे हैं। पीएम ने कहा कि डॉ. अंबेडकर का इस राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान है लेकिन उनकी भूमिका को कमतर करने की कोशिश की गई, हालांकि यह कोशिशें असफल रहीं। पीएम ने आगे कहा कि उनकी भूमिका को मिटाने की कोशिशें असफल रहीं, वो लोगों के दिमाग में अपनी प्रभाव ज्यादा बना सके और वो भी उस परिवार से ज्यादा जिसके लिए ऐसी कोशिशें की गईं। पीएम ने कहा कि सरकार बाबा साहेब की जिंदगी से जुड़ी जगहों को तीर्थस्थल के रूप में विकसीत करने का काम कर रही है।
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गुजरात चुनाव: 9 प्रतिशत अंतर पाटना कांग्रेस की बडी चुनौती
अहमदाबाद। गुजरात के 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को जहां 47.85 प्रतिशत मत मिले वहीं कांग्रेस को 38.93 फीसदी मत हासिल हुए। गत चुनाव में दोनों दलों के बीच 8.92 फीसदी मतों का अंतर रहा जिसे पाटना कांग्रेस के लिए सबसे बडी चुनौती है। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 165 सीटों पर बढ़त हासिल की लेकिन एक साल बाद ही निकाय चुनाव में कांग्रेस ने 33 में से 23 जिला पंचायतों पर काबिज हो गई थी। गांधीनगर के किले पर किस पार्टी का राज होगा यह तो 18 दिसंबर को ही तय होगा लेकिन यह चुनाव जीतने के लिए भाजपा व कांग्रेस ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है। विधानसभा की 182 सीट में से सरकार बनाने के लिए 92 सीट की दरकार है लेकिन भाजपा जहां 150 सीट का लक्ष्य लेकर चल रही है वहीं कांग्रेस भी 125 सीट जीतने का दावा कर रही है। पांच साल पहले हुए गुजरात चुनाव में भाजपा ने 118 सीटी, कांग्रेस ने 57, एनसीपी ने 2, जीपीपी ने 2, जदयू ने एक, निर्दलीय एक सीट पर जीता बाद में उपचुनाव व दल बदल के चलते फिलहाल भाजपा के 121 व कांग्रेस 44 विधायक हैं। कांग्रेस से अलग हुए एक दर्जन विधायकों में से अधिकांश भाजपा में शामिल हो गए इससे भाजपा की स्थिति मजबूत होनी चाहिए लेकिन पाटीदार, ओबीसी व दलित आंदोलन के चलते भाजपा में अंदरखाने एक चिंता बनी हुई है। गौरतलब है कि भाजपा ने 2014 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान सभी 26 सीट पर कब्जा जमा लिया था लेकिन इसके एक साल बाद ही 2015 में हुए स्थानीय निकाय चुनाव में कांग्रेस ने 33 में से 23 जिला पंचायत जीत ली जिसके चलते इस बार दोनों ही दल चुनाव परिणामों को लेकर आशंकित हैं। गत चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस पर अधिकांश जिलों में मत प्रतिशत में बढत हासिल की, इनमें अहमदाबाद, सूरत, भावनगर, वडोदरा व देवभूमि द्वारका में मत अंतर 14 से 25 प्रतिशत का रहा। मुख्यमंत्री के ग्रह जिले राजकोट जिले में भाजपा ने 9 प्रतिशत जबकि उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल के ग्रह जिले मेहसाणा में भाजपा 13 फीसदी मतों से आगे रही थी। भाजपा अध्यक्ष जीतूभाई वाघाणी के जिले भावनगर में भाजपा 18 प्रतिशत मत से आगे थी जबकि कांग्रेस अध्यक्ष भरतसिंह सोलंकी के ग्रह जिले आणंद में अंतर 4.59 प्रतिशत रहा। सबसे कम अंतर पाटण व छोटा उदेपुर में .11 प्रतिशत तथा पोरबंदर व गीर सोमनाथ में .5 प्रतिशत का रहा।
वर्ष 2012 गुजरात विधानसभा चुनाव
भाजपा 47.85
कांग्रेस 38.93
अंतर 8.92
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शिवपाल सिंह यादव ने कहा, ईवीएम में गड़बड़ी होती तो मैं विधायक नहीं होता
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की सफलता के बाद विपक्षी दलों के निशाने पर भले ही ईवीएम हो, लेकिन समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल सिंह यादव की इसको लेकर राय जुदा है। शिवपाल सिंह यादव मानते हैं कि ईवीएम में कहीं भी कोई गड़बड़ी नहीं है। अभी तक तो इसका कोई सुबूत भी नहीं मिला है। शिवपाल ने ईवीएम से छेड़छाड़ को खारिज किया।  अखिलेश यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे शिवपाल सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी के गढ़ माने जाने वाले मैनपुरी में साफ कहा कि ईवीएम में कोई गड़बड़ी नहीं है। अगर इसमें कोई गड़बड़ी होती तो तमाम मामले सामने आ जाते। अभी तक तो एक भी ऐसा मामला सामने नहीं आया है। इटावा के जसवंतनगर से समाजवादी पार्टी के विधायक शिवपाल सिंह यादव नहीं मानते कि ईवीएम में कोई खोट है। उन्होंने साफ कहा कि अगर ईवीएम में गड़बड़ी होती तो मैं भी विधानसभा चुनाव नहीं जीतता। शिवपाल यादव का यह कथन पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के इन आरोपों का खंडन करता है कि नगर निकाय चुनावों में भाजपा ने मेयर पदों पर भारी जीत ईवीएम में गड़बड़ी किये जाने से जीती। उन्होंने ईवीएम में गड़बड़ी के पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान पर कहा कि मैंने तो ईवीएम से हुए चुनाव में जीता हूं। मेरे पास ईवीएम को लेकर कोई सुबूत नहीं है। कोई सुबूत होगा, तो इस पर बोलूंगा। शिवपाल यादव ने कहा कि ईवीएम में गड़बड़ी के दावों का कोई पुख्ता सबूत नहीं है। शिवपाल ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि इवोम से छेड़छाड़ हुई। इवोम से छेड़छाड़ के कोई सुबूत नहीं है। सुबूत हों तो ही इस संबंध में बात की जा सकती है। उन्होंने जोड़ा कि विधानसभा चुनाव उन्होंने भी लड़ा लेकिन वे तो जीते हैं। उनके सारे समर्थक भी निकाय चुनाव में जीते हैं। बिना सुबूत के इवोम में छेड़छाड़ की बात वे नहीं कह सकते।
चुनाव में मुझे जिम्मेदारी मिलती तो सपा को जीत दिला देता
मैनपुरी के करहल में एक विवाह समारोह में आए सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने निकाय चुनाव में कभी सत्ता में रही समाजवादी पार्टी की करारी हार पर कहा कि हमें जिम्मेदारी मिली होती तो चुनाव में विजय होती। उन्होंने करहल में सपा के दूसरा प्रत्याशी घोषित करने और समर्थन दूसरे प्रत्याशी को देने के सवाल पर कहा कि मुझे इसकी जानकारी नहीं है। शिवपाल ने कहा कि हमने जिनका समर्थन किया था, वह जीत गए। किसी का नाम लिए बगैर कहा कि उन्होंने जो प्रत्याशी उतारे, उसकी जिम्मेदारी उनकी ही थी। उन सभी को जीत मिली। उन्होंने यह भी कहा कि निकाय चुनावों में उन्होंने जितने भी प्रत्याशियों का समर्थन किया वे सभी विजयी रहे। उनका कहना था कि निकाय चुनावों में पराजय की जिम्मेवारी पूरी पार्टी को लेनी होगी। शिवपाल यादव ने अखिलेश यादव के नेतृत्व में विधानसभा और निकाय चुनावों में पार्टी की असफलता पर सीधे कुछ कहने से इनकार कर दिया लेकिन उन्होंने एक चतुर राजनेता की तरह अपनी बात से यह संकेत तो दे ही दिया कि पार्टी नेतृत्व प्रत्याशियों को सही दिशा और समर्थन नहीं दे पाया। पार्टी के भीतर कुछ लोग पहले ही यह कह रहे हैं कि जमीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को बांधने का जो काम शिवपाल सिंह यादव करते थे वह नहीं हो पाया।
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