Sun Sep 23 8:53:58

दिग्विजय से मुलाकात पड़ी भारी, चुनाव आयोग ने कर दिया ट्रांसफर
जबलपुर। सियासी लोगों से मिलना अधिकारियों को कितना भारी पड़ सकता है ये मध्यप्रदेश के जबलपुर में रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी के कुलसचिव से बेहतर कोई नहीं समझ सकता। रेलवे स्टेशन पर एक मुलाकात ने चुनावी माहौल में नया गुल खिला दिया। हवा उड़ी कि कुलसचिव कांग्रेस से चुनाव मैदान में उतर रहे हैं। आयोग के पास तक मुलाकात की तस्वीरें पहुंच गईं। फिर क्या, फौरन तबादले के आदेश जारी हो गए। कुलसचिव को चित्रकूट ग्रामोदय यूनिवर्सिटी भेज दिया गया। गुरुवार की दोपहर यूनिवर्सिटी में तबादले की खबर उड़ गई। आयोग के निर्देश पर उच्च शिक्षा विभाग से कुलसचिव डॉ. बी भारती के तबादले का आदेश पहुंचा। उन्हें तत्काल चित्रकूट यूनिवर्सिटी में कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश मिले।
यूनिवर्सिटी में भी विरोध
रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी में भी कुछ कर्मचारी कुलसचिव के खिलाफ लॉबिंग करने में जुटे रहे। इस संबंध में कई नेताओं के पास जाकर सरकार को तबादले के लिए सिफारिशी पत्र लिखवाए। बताया जाता है कि भाजपा के कई नेताओं ने कुलसचिव के खिलाफ पत्र शासन को भेजे हैं।
परीक्षा नियंत्रक बाजपेयी को कुलसचिव का प्रभार
रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी का प्रभारी कुलसचिव प्रो.राकेश बाजपेयी को बनाया गया है। वे परीक्षा नियंत्रक के दायित्व का भी निर्वहन करेंगे। कुलसचिव डॉ. बी भारती ने उन्हें कार्यभार सौंपा। उनकी विदाई में कई कर्मचारी शामिल हुए। कुलपति प्रो.कपिल देव मिश्रा, उपकुलसचिव दीपेश मिश्रा समेत अन्य कर्मियों ने उन्हें शुभकामनाएं दी।
रेलवे स्टेशन पर पूर्व मुख्यमंत्री से मिलना बना मुसीबत
चुनाव आयोग के पास शिकायत के साथ एक तस्वीर भी पहुंची है। सूत्रों की मानें तो उसमें कुलसचिव डॉ. बी भारती दिग्विजय सिंह के करीब खड़े हैं। ये तस्वीर पिछले दिनों रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के इंतजार में खड़े दिग्विजय सिंह के साथ खींची गई। शिकायत करने वालों ने कांग्रेस से टिकट मांगने की बात का भी जिक्र आयोग से किया है।
प्रशासनिक व्यवस्था के तहत तबादला चित्रकूट यूनिवर्सिटी में हुआ है। मेरा किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। तबादला सामान्य प्रक्रिया है।
-डॉ.बी भारती, कुलसचिव, आरडीयू
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राजनीति की भेंट चढ़ी सड़कें, चुनाव से पहले भरेंगे गड्ढे
रायगढ़ । रायगढ़ विधानसभा चुनाव में इस बार सड़कें अहम मुद्दा हैं। विधानसभा से होकर दो-दो नेशनल हाइवे गुजरते हैं। बीते चार साल से इस पर काम चल रहा है। इस दौरान धीमे निर्माण के कारण जनता को लंबी परेशानी झेलनी पड़ी है। एनएच के अलावा शहर को जोडऩे वाले स्टेट हाईवे एवं प्रमुख मार्गों के लिए भी कागजों में बहुत काम हुआ है लेकिन टेंडर एवं वर्कआर्डर के चक्कर में ज्यादातर काम पेंडिंग हैं। शहर की सड़कों के लिए बात की जाए तो यहां पर हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। शहर के तीनों एंट्री प्वाइंट पर सड़क में बड़े-बड़े गड्ढे हो रखे हैं। जांजगीर व नंदेली रोड से आने के दौरान कोतरा रोड रेलवे क्रॉसिंग वाले मार्ग में सड़क में चार से पांच फिट गड्ढे हैं। बारिश में इस बार दो बार खराब सड़क के कारण वाहन के फंस जाने के कारण ट्रेक पर ट्रेन को आने से रोका गया था। जशपुर अंबिकापुर मार्ग से रायगढ़ आते समय ढिमरापुर मार्ग की भी बिल्कुल ऐसी ही हालत है। वहीं चन्द्रपुर सारंगढ़ से आने वाले मार्ग में भी एनएच के आधे-अधूरे काम के कारण शहरवासियों को परेशान होना पड़ रहा है लेकिन शहर की इन सड़कों के लिए विधायक रोशनलाल निगम सरकार पर दोष मढ़ रहे हैं। विधायक का दावा है कि उनके प्रयास से नगरीय प्रशासन ने शहर की सड़कों के लिए बीते दो साल में ही 42 करोड़ से अधिक का फंड दिया है लेकिन इस राशि से वार्ड पार्षद शहर की मुख्य सड़कों की जगह वार्डों में सीसी रोड व नाली बनवा रहे हैं।
क्या है सड़क की जमीनी सच्चाई
कोतरा रोड क्रासिंग में प्रस्तावित आरओबी के कारण नेशनल हाइवे के अधिकारी इस सड़क के लिए अलग से कोई प्लान नहीं बना रहे हैं। इसलिए बारिश के बाद और चुनाव से पहले इन गड्ढों को भरकर पेचिंग की ही लीपापोती की जाएगी।
इसी तरह ढिमरापुर बायपास भी पीडब्ल्यूडी एवं एनएचएआई द्वारा बनाए जाने वाले रायगढ़ पत्थलगांव फोरलेन के कारण अटका हुआ है। वहीं चंद्रपुर सारंगढ़ वाले मार्ग में एनएच का काम पूरा होने में वक्त है।
कम हुई ओडिशा की दूरी 
रायगढ़ विधानसभा में पीएमजेएसवाय से मेडिकल कालेज से एकताल रोड के लिए काम होना है। इसमें करीब 10 करोड़ रूपए खर्च होने हैं। 10 से अधिक गांवों को जोडऩे वाली 12 करोड़ की लागत वाली गढ़उमरिया से पुसौर सड़क बनी है।
लारा एनटीपीसी से देवलसुर्रा मार्ग के लिए भी काम हुआ है। सरिया भटली सांकरा होते हुए ओडिशा बार्डर तक की सड़क लंबे इंतजार के बाद बनी है। पीएमजेएसवाय में इसके निर्माण से ओडिशा की दूरी 7 किमी कम हुई है।
निगम प्रशासन व जनप्रतिनिधि गंभीर नहीं 
विधायक रोशनलाल अग्रवाल ने कहा कि शहर की सड़कों के लिए मेरे प्रयास से नगरीय प्रशासन से करीब 42 करोड़ मिले हैं लेकिन यहां पर निगम सरकार व जनप्रतिनिधि गंभीर नहीं हैं। ढिमरापुर बायपास एनएचएआई के प्रस्तावित रायगढ़ पत्थलगांव मार्ग में बनना है।
पीएमजेएसवाय से बीते 2 साल में ही 48 करोड़ रूपए स्वीकृत कराए हैं। इनमें काम भी शुरू हो गया है। एकताल रोड का निर्माण होना है। सरिया भटली सांकरा वाली सड़क बनी है। इससे ओडिशा की दूरी भी कम हुई है। 11 करोड़ की सर्किट हाउस रोड पर भी काम चालू है।
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भाजपा के युद्धवीर ने सिंहदेव को कहा, दादा आप होंगे बेहतर मुख्यमंत्री
रायपुर। छत्तीगसढ़ में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के दौरे से पहले भाजपा विधायक युद्धवीर सिंह जूदेव के बयान ने सियासी हलचल तेज कर दी है। चंद्रपुर से विधायक युद्धवीर सिंह जूदेव ने फेसबुक पर नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव को बेहतर सीएम बताया है। जूदेव ने लिखा कि आदरणीय दादा, आप छत्तीसगढ़ के लिए एक बेहतरीन मुख्यमंत्री साबित होंगे। आपकी सरलता आपकी ताकत है। युद्धवीर के इस बयान को पार्टी ने गंभीरता से लिया है। भाजपा सत्ता की चौथी पारी के लिए मिशन 65 प्लस लेकर मैदान में उतर रही है। ऐसे में कांग्रेस नेता को बेहतरीन मुख्यमंत्री बताना संगठन को नागवार गुजर रहा है। भाजपा के आला नेताओं बताया कि युद्धवीर के बयान की जानकारी केंद्रीय नेतृत्व को दी गई है। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के दौरे की तैयारी में जुटे संगठन ने इस बयान को गंभीरता से लिया है। प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में राष्ट्रीय सहसंगठन महामंत्री सौदान सिंह ने पार्टी पदाधिकारियों की बैठक ली। इसमें भी युद्धवीर का बयान चर्चा में रहा। इससे पहले नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने कहा था कि जहां से युद्धवीर सिंह जूदेव चुनाव लड़ेंगे, वहां प्रचार करने नहीं जाऊंगा। सिंहदेव ने कहा था कि आज वो अगर विधायक हैं, तो दिलीप सिंह जूदेव की बदौलत है। जूदेव ने उनके खिलाफ अंबिकापुर में प्रचार नहीं किया था।
युद्धवीर के बागी तेवर पर संगठन सख्त 
बताया जा रहा है कि भाजपा विधायक युद्धवीरसिंह जूदेव अपनी पत्नी संयोगिता सिंह जूदेव के लिए रायगढ़ से विधानसभा के टिकट की मांग कर रहे हैं। संगठन से पाजिटिव संकेत नहीं मिलने के बाद युद्धवीर ने बागी तेवर अपना लिया है। बताया जा रहा है कि संगठन पहले से ही युद्धवीर से नाराज चल रहा है। ऐसे में सिंहदेव को बेहतरीन सीएम बताने पर संगठन कार्रवाई भी कर सकता है। युद्धवीर की पोस्ट पर पार्टी के नेताओं ने कमेंट भी किया है। फिरोज साहू ने लिखा कि संभलकर पोस्ट करें नेताजी, कहीं ये कमेंट आपकी टिकट न काट दे।
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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में 72 फीसदी उम्मीदवार नहीं बचा सके जमानत
मध्यप्रदेश के पिछले 14 विधानसभा चुनावों का रिकॉर्ड बताता है कि औसत 72 फीसदी की जमानत जब्त हो जाती है। 1951 से 2013 के बीच हुए इन विधानसभा चुनावों में कुल 31,519 प्रत्याशियों ने किस्मत आजमाई, जिनमें से 22,907 जमानत नहीं बचा पाए। पढि़ए बीते चुनावों में जमानत जब्ती संबंधी रोचक जानकारियां-
2018 में होने वाले मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले पार्टियों में टिकट की दावेदारी का जबरदस्त माहौल है। भाजपा और कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दलों के अलावा कई क्षेत्रीय दल भी अपने प्रत्याशी उतारेंगे। बड़ी संख्या में पैराशूट नेता और निर्दलीय भी मैदान में होंगे। प्रदेश के अब तक हो चुके हर विधानसभा चुनाव के आंकड़ों का विश्लेषण करने से पता चलता है कि बड़ी संख्या में नेता किस्मत आजमाते हैं, लेकिन जमानत भी जब्त करवा बैठते हैं। दरअसल जीतना हर कोई चाहता है, लेकिन फिर भी कई उम्मीदवारों का मकसद चुनाव में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना, हार तय दिखाई दे फिर भी लडऩा और अपने पक्ष में समर्थन हो या न हो, लड़ कर अपना लोहा मनवाने की पूरी कोशिश करना होता है।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 34(1)(ख) के अनुसार, यदि कोई प्रत्याशी कुल मान्य वोटों के छठे हिस्से के बराबर वोट हासिल नहीं कर पाता है तो उसकी जमानत जब्त हो जाती है। उदाहरण के लिए, किसी विधानसभा में दस लाख मत पड़े हैं तो जो प्रत्याशी 1,66,666 से कम वोट लाएगा उसकी जमानत के रूप में जमा करवाई गई राशि वापस नहीं मिलेगी। विधानसभा चुनाव लडऩे वाले सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार को 10,000/- रुपए बतौर जमानत जमा करने होते हैं। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के प्रत्याशियों के लिए यह राशि 5000 रुपए है। 2010 से पहले सामान्य श्रेणी के लिए यह राशि 250 रुपए और एससी-एसटी के लिए 125 रुपए जमानत राशि थी। यह राशि चुनाव आयोग के खाते में जमा रहती है।
चुनाव जीतने पर भी जब्त हो सकती है जमानत
देश में ऐसे भी रोचक मामले सामने आए हैं, जब प्रत्याशी चुनाव जीत गया, लेकिन उसकी जमानत जब्त हो गई। 1990 के बिहार विधानसभा चुनाव में फारबिसगंज सीट से भाजपा के मायानंद ठाकुर जीते, लेकिन उनके वोट कुल मतों का 1/6 हिस्सा नहीं थे। उन्हें 95,350 में से 15,777 वोट ही मिले। बाकी प्रत्याशियों के वोट इससे भी कम थे, इसलिए मायानंद चुनाव जीत गए, लेकिन नियमानुसार जमानत भी जब्त हो गई। 2012 में दिल्ली नगर निगम के चुनाव में वार्ड क्रमांक 134 के चुनाव में भी ठीक ऐसा ही हुआ था।
जमानत खोने वाले प्रत्याशियों के रोचक आंकड़े
मध्यप्रदेश में अब तक 14 चुनाव हुए हैं। 2013 में कुल 2813 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था, जिनमें से 2313 (82त्न) की जमानत जब्त हो गई। 1990 के चुनावों में सबसे ज्यादा 3521 प्रत्याशियों की जमानत जब्त (83त्न) हुई थी।
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चुनाव में सड़क व रेलमार्ग ही नहीं, वायुमार्ग पर भी नजर रखेगा आयोग
रायपुर। चुनाव के दौरान अवैध धन पर निगरानी के लिए चुनाव आयोग सड़क व रेलमार्ग ही नहीं वायुमार्ग पर भी नजर रखेगा। राज्य निर्वाचन कार्यालय में बुधवार को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुब्रत साहू ने विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने के उपायों पर चर्चा हुई। इसमें विधानसभा निर्वाचन के दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती पर गहन विचार विमर्श किया गया। सुरक्षा बलों के रुकने, आवागमन के इंतजामों को लेकर चर्चा हुई। साहू ने कहा कि आचार संहिता प्रभावशील होने के बाद अवैध रूप से परिवहन की जाने वाली राशि और सम्पत्ति को जब्त करने की कार्रवाई तेज की जाएगी। इसके लिए आयकर विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। बैठक में विधानसभा निर्वाचन को लेकर सुरक्षा संबंधी गोपनीय पहलुओं पर भी चर्चा की गई। बैठक में बताया गया कि आयोग के निर्देशानुसार विधानसभा निर्वाचन के दौरान बैंक और एटीएम से नगद राशि की अप्रत्याशित आपूर्ति की गहन निगरानी की जाएगी। वहीं राशि के परिवहन के लिए नियोजित वाहनों पर भी आयोग की कड़ी निगाह रहेगी। निर्वाचन व्यय के दृष्टिकोण से संवेदनशील विधानसभा क्षेत्रों को चिन्हांकित किया गया है। संवेदनशील विधानसभा क्षेत्रों में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा गहन निगरानी रखी जाएगी। इसके लिए आयकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं। सभी बैंकों से किसी खाते से सतत राशि आहरण होने की नियमित रिपोर्ट ली जाएगी। आदर्श आचरण संहिता के प्रभावशील होते ही बैंकों से निर्धारित सीमा से अधिक की राशि के आहरण की जानकारी लेने के साथ एटीएम में सामान्य से अधिक फ्रिक्वेंसी में करेंसी रिफिल किए जाने पर भी आयोग निगाह रखेगा।
24 घंटे संचालित होगा एटीसी
एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) को निर्वाचन अवधि में 24 घण्टे संचालित रखा जाएगा। आने और जाने वाले चार्टर्ड फ्लाइट और हेलीकॉप्टर की जानकारी एयरपोर्ट अथॉरिटी से मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को प्रतिवेदित किया जाना अनिवार्य होगा। मोटरयान अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं निर्वाचन को प्रभावित करने वाले प्रलोभन सामग्री के परिवहन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अंतर्गत सड़क, रेलमार्ग, वायुमार्ग और जलमार्ग परिवहन पर निगरानी रखी जाएगी।
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बसपा ने पहली सूची जारी की, 22 प्रत्याशी घोषित, अकेले चुनाव लडऩे के संकेत
भोपाल। कांग्रेस के गठबंधन की चर्चाओं के बीच बहुजन समाज पार्टी (क्चस्क्क) ने आगामी विधानसभा चुनावोंं के लिए अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी। पहली सूची में 22 नाम शामिल किए गए हैं। बसपा द्वारा सूची जारी करने के बाद कांग्रेस के बसपा के संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। बसपा के प्रदेश प्रभारी राम अचल राजभर ने पार्टी की पहली सूची जारी करते हुए स्पष्ट किया कि मौजूदा 4 विधायकों में से 3 को दोबारा मौका दिया गया है। इनमें मौजूदा विधायक शीला त्यागी, ऊषा चौधरी और सत्य प्रकाश शंखवार शामिल हैं। बसपा ने मुरैना के दिमनी विधानसभा से अपनी पार्टी के विधायक बलवीर सिंह दंडोतिया का नाम सूची में शामिल नहीं किया है। बसपा ने जो सूची जारी की है उसमें मुरैना, रीवा, दमोह, सतना सहित अपने प्रभाव वाले अन्य इलाके शामिल हैं। प्रदेश प्रभारी ने मप्र में गठबंधन की संभावना से फिलहाल इंकार किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी सभी 230 सीटों पर चुनाव लड़ेगी क्योंकि अभी तक किसी भी पार्टी से गठबंधन को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है। बसपा द्वारा जारी सूची इस प्रकार है --
दिल्ली में पटियाला कोर्ट ने गुरुवार को सुनंदा पुष्कर मामले को 4 अक्टूबर को स्थगित कर दिया है. इससे पहले 24 अगस्त को दिल्ली पुलिस ने सुनंदा पुष्कर हत्याकांड मामले में सारे दस्तावेज दिल्ली की एक अदालत को सौंप दिए थे. दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने इस मामले में सुनंदा के पति और कांग्रेस नेता शशि थरूर को अभियुक्त माना है, जिनके खिलाफ मामले की सुनवाई चल रही है.
भोपाल। महिलाओं की सुरक्षा के लिए बने कानून का भी दुरुपयोग हो रहा है। पिछले एक साल में बहुओं ने सास-ससुर और जेठ के खिलाफ थानों में दहेज प्रताडऩा की 50 से अधिक झूठी शिकायतें दर्ज कराईं। यह खुलासा परिवार कल्याण समिति द्वारा की गई जांच में सामने आया है। इन मामलों में आरोपित ससुराल पक्ष वालों को समिति की सिफारिश पर बरी कर दिया गया।
बता दें कि ससुराल पक्ष के खिलाफ थानों में दर्ज मामलों की जांच सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के निर्देशानुसार बनी परिवार कल्याण समिति द्वारा की जाती है। अप्रैल में गठित समिति के पास अगस्त 2018 के बीच 100 से अधिक शिकायतें पहुंची। समिति का कहना है कि महिलाएं छोटे-छाटे मामलों में ससुराल वालों पर दहेज प्रताडऩा का केस दर्ज करा देती हैं। जांच-पड़ताल का इन्हें खारिज कर दिया जाता है। इस तरह सास-ससुर और जेठ के खिलाफ दहेज प्रताडऩा को लेकर 50 झूठी पाई गईं।
छोटी बहू ने दहेज प्रताडऩा का मामला दर्ज कराया
अयोध्या नगर निवासी शंकुतला साहू (काल्पनिक नाम) और उनके पति सरकारी नौकरी में हैं। वे आर्थिक रूप से संपन्न हैं। 2016 में उनके छोटे बेटे की शादी एक गरीब परिवार की लड़की से की, लेकिन शादी के करीब 6 महीने बाद बेटे ने बताया कि बहू उसके पीछे घर में अपने प्रेमी को बुलाती है। जब उसने मना किया तो बहू लड़कर मायके चली गई और बेटे सहित सास-ससुर के खिलाफ दहेज की मांग को लेकर उसे प्रताडि़त करने की शिकायत दर्ज करा दी। समिति ने जांच की और ससुराल वालों को बरी किया।
मकान में हिस्सा पाने के लिए दर्ज कराया मामला
कोलार निवासी निर्मल सिंह और सविता (काल्पनिक नाम) की शादी नवंबर 2016 को हुई थी। विवाह के बाद से ही पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ। इस पर पत्नी ने पति सहित सास, ससुर और ननद के खिलाफ दहेज के लिए प्रताडि़त करने का मामला दर्ज करा दिया। परिवार कल्याण समिति की जांच में खुलासा हुआ कि पीडि़ता ने ससुराल के मकान में हिस्सा पाने के लिए गुस्से में शिकायत दर्ज करादी थी। समिति ने इस मामले में काउंसलिंग की जिसके बाद पीडि़ता ने अपनी शिकायत वापस ले ली।
परिवार न टूटे
यह समिति सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार बनी है। हमारा प्रयास रहता है कि घर और परिवार न टूटे। लेकिन दहेज प्रताडऩा के कई मामले झूठे भी होते हैं। जांच कर बेकसूर ससुराल पक्ष को बरी किया जाता है और कई मामलों में केस दर्ज भी कराया जाता है।
- रीता तुली, वरिष्ठ काउंसलर, परिवार कल्याण समिति
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सिंधिया-कमलनाथ एसी का मोह नहीं छोड़ पा रहे, कार्यकर्ताओं से क्या मिलेंगे- नरोत्तम मिश्रा
भोपाल। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के भोपाल दौरे पर पलटवार करते हुए भाजपा ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ तो ब्लैककेट कमांडो से घिरे रहते हैं, सिंधिया कभी कार्यकर्ताओं से हाथ नहीं मिलाते। ऐसे नेताओं के पास कार्यकर्ताओं से मिलने का वक्त कहां है। कैबिनेट मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि ये लोग एसी का मोह नहीं छोड़ पाते हैं और हमारे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मई-जून में गांव-गांव जाकर आम लोगों से मिलते हैं, उनके दुख दर्द जानते हैं। मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस का शो सिर्फ दिखावा है। कांग्रेस नेता सिर्फ चुनावी पर्यटन पर आते हैं और प्लेन से दिल्ली जाकर सोते हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के भोपाल दौरे को भाजपा ने चुनावी पर्यटन बताया है। लगातार तीसरे दिन कांग्रेस पर हमला करते हुए जनसंपर्क मंत्री मिश्रा ने कहा कि राहुल गांधी कार्यकर्ताओं को झूठे सपने न दिखाएं। हमारे मुख्यमंत्री का दरवाजा 24 घंटे खुला रहता है। सारे मंत्रियों से कभी भी कोई भी मिल सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जो सपने दिखा रही है वह हकीकत से परे है। कमलनाथ-सिंधिया तो अभी ही कार्यकर्ताओं से इतने दूर रहते हैं कि उनसे मिल पाना नामुमकिन है। मिश्रा ने कांग्रेस के कार्यकर्ता संवाद को भी प्रायोजित संवाद बताया। नेताओं ने ही मनमर्जी से सवाल तय कर लिए थे और उन्हीं के जवाब दे दिए गए। भाजपा मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में भाजपा ने उस बच्चे को भी पेश किया जिसकी फीस भरने का राहुल गांधी ने पिछले साल भरोसा दिलाया था। पार्टी ने कहा कि पिछले आठ महीने से इसकी फीस नहीं चुकाई गई है।
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सांसद-विधायकों के बंगले पर बैठक की मनाही नहीं - कांताराव
भोपाल। आचार संहिता लगने से पहले फिलहाल सांसद-विधायकों के बंगले पर राजनीतिक दलों की बैठक लेने पर कोई मनाही नहीं है। मप्र के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कांताराव ने सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि के सरकारी निवास पर अभी राजनीतिक दलों की बैठक या अन्य गतिविधियों की मनाही नहीं है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि आचार संहिता लगने के बाद इसकी मनाही है या नहीं। इस संबंध में भारत निर्वाचन आयोग से मार्गदर्शन लिया जा रहा है। गौरतलब है कि कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओपी रावत से शिकायत की थी कि मुख्यमंत्री के सरकारी निवास पर भाजपा के कार्यक्रम हो रहे हैं, इस पर रोक लगाई जाए।
मतदाता सूची में नाम जोडऩे किया 16 लाख ने आवेदन
31 जुलाई के बाद मप्र में करीब 16 लाख लोगों ने मतदाता सूची में पहली बार अपना नाम जोडऩे के लिए आवेदन किया है। इतनी बड़ी संख्या में आवेदन आने पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कांताराव ने कहा कि अभी इन आवेदनों की जांच चल रही है। यदि सही पाए जाते हैं तो सभी के नाम मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे। वहीं नाम हटाने के लिए 7 लाख 30 हजार आवेदन आयोग को मिले हैं। कातांराव ने बताया कि निर्वाचन आयोग के पास राज्य के 1 करोड़ 16 लाख 5 हजार से ज्यादा मतदाताओं के मोबाइल नंबर है। मतदाता सूची में कई महिलाओं का पहली बार नाम जुड़ा, इससे मतदाताओं का लिंग अनुपात 905 से बढ़कर 912.75 हो गया।
वाहन चैकिंग के दौरान 15 करोड़ रुपए का जुर्माना
जून से अब तक वाहन चैकिंग के दौरान लगभग 15 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है। यह जुर्माना अवैध शराब और अवैध हथियार पर लगाया गया है। चैकिंग के दौरान दो लाख 24 हजार लीटर शराब जब्त की गई है। वहीं पिछले एक महीने में 4 हजार वाहनों पर से अवैध हूटर, साइरन हटाए गए हैं। मोटरयान अधिनियम का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर पुलिस विभाग ने करीब 1 करोड़ रुपए का जुर्माना किया है।
संपत्ति विरूपण अधिनियम लागू करवाना विभाग की जिम्मेदारी
कांताराव ने बताया कि आयोग ने 56 विभागों के प्रमुख अधिकारियों को चिठ्ठी लिखकर कहा है कि सभी विभाग प्रदेश में स्थित उनके दफ्तरों पर संपत्ति विरुपण अधिनियम लगवाए। भोपाल में सरकारी इमारतों पर लगे होर्डिंग बैनर पर उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन इस पर कार्रवाई करेगा।
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टी-20 जैसे रोमांचक थे ये सियासी मुकाबले, इस बार भी थमीं रहेंगी सांसें
सियासी मुकाबलों का रोमांच भी टी-20 क्रिकेट के मुकाबलों से कम नहीं। हर चुनाव में कुछ सीटें ऐसी होती हैं, जहां चंद वोट से हार-जीत का फैसला होता है। घमासान मुकाबले के बाद वोटों का इतना कम अंतर जीत-हार अगले चुनाव के लिए बेहद मायने रखता है क्योंकि उम्मीदवारों यह जान जाते हैं कि फिर कांटे की टक्कर हुई तो अंतिम समय में कोई भी फैसला हो सकता है। 2013 के चुनाव में 8 सीटें ऐसी थीं, जिन पर हजार से कम वोटों के अंतर से फैसला हुआ। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि इन 8 में से 4 सीटें आरक्षित थीं। 2013 के सबसे करीबी मुकाबले में सुरखी सीट से भाजपा के पारुल साहू केसरी ने कांग्रेस के गोविंद सिंह राजपूत को 141 वोटों से हरा दिया था। 2013 की पांच बड़ी जीत में जहां चार भाजपा के नाम थी, वहीं करीबी मुकाबलों में जीतकर विधानसभा पहुंचने वालों में गैर-भाजपाई (कांग्रेस-बसपा-निर्दलीय) प्रत्याशी ज्यादा रहे।
2013 के करीबी मुकाबले
1. सुरखी (सामान्य) : भाजपा के पारुल साहू केसरी ने कांग्रेस के गोविंद सिंह राजपूत को 141 वोट से मात दी। केसरी को जहां 59,513 वोट मिले, वहीं राजपूत के खाते में 59,372 वोट पड़े। कुल 18 उम्मीदवार मैदान में थे और विजेता-उपविजेता के वोट प्रतिशत में महज 0.10 का अंतर था।
2. जतारा (एससी) : कांग्रेस के दिनेश कुमार अहिरवार ने भाजपा के हरिशंकर खटीक को 233 मतों से हराया था। अहिरवार को 51,149 वोट मिले थे, जबकि खटीक को 50,916 वोट से संतोष करना पड़ा था। कुल 11 प्रत्याशियों ने किस्मत आजमाई थी। अहिरवार और खटीक के बीच 0.18 फीसदी के वोट का अंतर था।
3. बरघाट (एसटी) : यहां जीत-हार का फैसला 269 वोट से हुआ था। भाजपा के कमल मरस्कोले को 77,122 वोट मिले थे, वहीं कांग्रेस के अर्जुन सिंह के खाते में 76,853 वोट पड़े थे। कुल 9 प्रत्याशी चुनाव लड़े थे। विजयी होने वाले और हाने वाले प्रत्याशी के बीच 0.16 फीसदी वोट का फासला था।
4. मनगवां (एससी) : बसपा की शीला त्यागी ने भाजपा की पन्नाबाई प्रजापति को 275 वोट से हराया था। शीला को जहां 40,349 वोट मिले थे, वहीं पन्नाबाई के खाते में 40,074 मत पड़े थे। कुल 10 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला हुआ था। शीला और पन्ना बाई के वोटों में 0.23 फीसदी का अंतर था।
5. सरदारपुर (एसटी) : यहां महज 529 वोटों से हार-जीत का फैसला हुआ था। भाजपा के वेलसिंह भूरिया ने 60,192 हासिल करते हुए 59,663 वोट वाले प्रताप ग्रेवाल को हराया था। कुल 7 प्रत्याशी मैदान में थे। भूरिया और ग्रेवाल के वोटों में सिर्फ 0.41 फीसदी का फर्क था।
6. इछावर (सामान्य) : कांग्रेस के शैलेंद्र पटेल ने भाजपा के करण सिंह को 744 मतों से हराया था। शैलेंद्र को 74,704 वोट मिले थे, जबकि करण सिंह के वोटों की संख्या 73,960 पर थम गई थी। कुल 13 प्रत्याशियों के बीच वोट बंटे थे और पटेल-सिंह के वोटों में 0.46 फीसदा का अंतर था।
7. जबलपुर पश्चिम (सामान्य) : कांग्रेस के तरूण भनोट ने भाजपा के हरेंदरजीत सिंह को 923 वोट से हराया था। भनोट को 62,668 वोट मिले थे, जबकि सिंह के खाते में 61,745 वोट गए थे। 12 प्रत्याशियों में मुकाबला हुआ था। 0.66 फीसदी ज्यादा वोट हासिल कर भनोट विधानसभा पहुंचे थे।
8. विजयराघवगढ़ (सामान्य) : कांग्रेस के संजय पाठक को 60,719 वोट मिले थे। उनके प्रतिद्वंदी भाजपा की पद्मा शुक्ला को 59,790 वोट मिले थे। इस तरह महज 929 वोट से हार-जीत का फैसला हुआ था। कुल 11 प्रत्याशी मैदान में थे। पाठक को शुक्ला से 0.62 फीसदी ज्यादा वोट मिले थे।
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दरोगा की महिला मित्र ने चुरा ली उसकी सर्विस पिस्टल, हुआ ये हाल
 
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