धर्म पर सियासत: मध्यप्रदेश पाने के लिए अब पंडित बने राहुल गाँधी

चित्रकूट: 2019 लोकसभा चुनाव की तारिख नज़दीक आती जा रही है और उससे पहले कुछ राज्यों में विधान सभा चुनाव भी होने हैं . ऐसे में सभी राजनितिक दल आवाम को लुभाने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं. दरअसल बात ये है कि इन दिनों देश की दो बड़े राजनितिक दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है, कांग्रेस एक राफेल सौदे को लेकर भाजपा की छवि बिगाड़ने की कोशिश में लगी है तो वहीं भाजपा के पास कांग्रेस सत्ता की 70 वर्षों की गलतियां गिनने के अलावा कोई चारा नहीं है. लेकिन अब चुनाव तो जीतना ही है, ऐसे में दोनों दलों ने भगवान के पैर पकड़े हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी बुधवार को मध्य प्रदेश में पार्टी का प्रचार करने चित्रकूट आए थे, इस दौरान उन्होंने प्रसिद्ध कामतनाथ मंदिर के दर्शन भी किए. कभी मुस्लिमों और दलितों के नाम पर राजनीति करने वाली कांग्रेस ने पहली बार ब्राह्मण समुदाय को वोट बैंक बनाने की कोशिश की है. राहुल गाँधी के चित्रकूट दौरे से पहले ही वहां कांग्रेस पार्टी के बड़े-बड़े बैनर लगे हुए हैं, जिनमे राहुल गाँधी को ''रामभक्त पंडित राहुल गाँधी'' बताया गया है. इससे पता चलता है कि वोटों की संख्या बढ़ने के लिए अब राहुल गाँधी रामभक्त और पंडित भी बन गए हैं, उल्लेखनीय है कि इससे पहले वे सौराष्ट्र में शिवभक्त भी बन चुके हैं. मध्य प्रदेश के विंध्य इलाका उत्तर प्रदेश से सटा हुआ है, इसके चलते वहां अखिलेश यादव की सपा और मायावती की बहुजन समाज पार्टी का भी थोड़ा बहुत प्रभाव देखने को मिलता है, कांग्रेस ने इन दोनों पार्टियों के सामने गठबंधन के लिए हाथ बढ़ाया था, लेकिन मायावती ने विधान सभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवार पहले ही घोषित कर दिए है, जिससे गठबंधन की गाँठ पहले ही खुल गई है. वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी कांग्रेस से ज्यादा गोंडवाना गणतंत्र पार्टी पर भरोसा दिखा रही है, बहुत संभव है कि अखिलेश भी कांग्रेस से गठबंधन तोड़कर गोंडवाना का हाथ थाम लें. ऐसे में मध्य प्रदेश में अलग-थलग पड़े राहुल गाँधी के पास श्रीराम की शरण में जाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है, हो सकता है उन्हें ये लगा हो की जब श्रीराम का नाम जपकर भाजपा केंद्र में सत्ता हासिल कर सकती है, तो श्रीराम का भक्त बनकर वे आशीर्वाद में मध्यप्रदेश तो पा ही सकते हैं.