निगम अफसर को बल्ले से पीटने वाले विधायक विजयवर्गीय जेल से रिहा, कहा- भगवान दोबारा बल्लेबाजी का मौका न दे

इंदौर. मध्यप्रदेश के इंदौर में निगम अफसर की बैट से पिटाई करने के मामले में आरोपी भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के विधायक पुत्र आकाश रविवार को जमानत पर रिहा हो गए। उन्होंने कहा, मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि मुझे दोबारा बल्लेबाजी करने का अवसर न दे। अब गांधीजी के दिखाए रास्ते पर चलने की कोशिश करूंगा। इंदौर जेल से बाहर आने पर समर्थकों ने माला पहनाकर आकाश का स्वागत किया। शनिवार शाम जमानत मिलने पर उनके समर्थकों ने भाजपा कार्यालय के बाहर हर्ष फायरिंग भी की। वहीं जिस जर्जर मकान को तोडऩे के दौरान विधायक ने निगम अफसर की पीटाई की थी उसे रविवार को तोड़ा जाना था लेकिन फिलहाल निगम ने उस मकान को तोडऩे की कार्रवाई को टाल दिया है। रविवार को जेल से रिहा होने के बाद आकाश ने मीडिया से कहा, जब पुलिस के सामने ही एक महिला को खींचा जाता है, मुझे उस समय कुछ और करने की बात समझ में नहीं आई। मैंने जो भी किया मुझे उसका अफसोस नहीं। लेकिन भगवान मुझे दोबारा बल्लेबाजी करने का मौका नहीं दे। रविवार को जेल प्रशासन ने आकाश को तय समय से डेढ़ घंटे पहले यानी साढ़े सात बजे ही रिहा कर दिया, ताकि जेल के बाहर भीड़ एकत्रित न हो।
भोपाल की विशेष अदालत से जमानत मिली
भोपाल की विशेष कोर्ट ने शुक्रवार को इंदौर से केस से जुड़े दस्तावेज मंगवाने के आदेश देते हुए सुनवाई के लिए शनिवार का दिन तय किया था। आकाश के खिलाफ दूसरा मामला बिजली कटौती को लेकर बिना अनुमति प्रदर्शन से जुड़ा था। पुलिस ने इस मामले में शुक्रवार को जेल में ही उनकी गिरफ्तारी की थी। शनिवार को जज सुरेश सिंह दोनों मामलों में दलीलें सुनने के बाद आकाश को 70 हजार रु के मुचलके पर जमानत दे दी।
समर्थकों ने किए 5 हवाई फायर
जामानत की जानकारी मिलने के बाद शनिवार शाम उनके समर्थकों ने खुशी में हवाई फायर किए। एक के बाद एक पांच गोलियां चलाई गई। गोलियों की आवाज से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। इस मामले से पुलिस पूरी तरह से अंजान बनी रही। संयोगितागंज थाने के अधिकारियों का कहना है कि हमारे पास गोली चलने की कोई शिकायत नहीं आई है। वहीं हर्ष फायर करने वाले कृपाल सिंह ने मीडिया से कहा कि जश्न के माहौल में एयर गन से हर्ष फायर किया गया है।
वकीलों की दलील- आकाश को बात रखने का मौका नहीं मिला
भाजपा विधायक के वकीलों ने कहा कि जिस महिला का मकान तोड़ा जा रहा था वह घटना वाले दिन ढाई बजे निगम अफसरों के खिलाफ बदसलूकी करने की रिपोर्ट लिखवाने गई थी। उसकी सुनवाई नहीं हुई तो विधायक वहां पहुंचे। पुलिस ने जनप्रतिनिधि की बात सुनने के बजाए उनके खिलाफ ही केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया। जबकि जनप्रतिनिधियों के खिलाफ ऐसे मामलों में जांच होनी चाहिए। उनका पक्ष भी सुना जाना चाहिए।
26 जून से इंदौर जेल में बंद थे आकाश
अफसर से मारपीट के केस में आकाश को 26 जून को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने उन्हें 11 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में इंदौर जेल भेज दिया था। इसके अगले दिन उन्होंने सत्र न्यायालय में जमानत के लिए अर्जी लगाई थी। यहां से केस एससी/एसटी कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया। गुरुवार को एससी/एसटी कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद आकाश के वकील ने भोपाल कोर्ट में याचिका दाखिल की।
निगमकर्मी को बैट से पीटा था
26 जून को निगम अधिकारी धीरेंद्र बायस टीम के साथ जर्जर मकान को ढहाने के लिए पहुंचे थे। इस दौरान आकाश वहां आए और टीम को बगैर कार्रवाई के लिए जाने के लिए कहा। लेकिन अधिकारियों ने कार्रवाई जारी रखी और आकाश ने बैट से अधिकारी की पिटाई की थी। शुक्रवार को बायस की तबीयत बिगडऩे पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

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